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जगदलपुर में लाल ईट (भट्टा) की रॉयल्टी में अधिकारियों का खेला

 


जगदलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासियों का मूल काम ईट बनाना, जिसकी अनुमति उनको नहीं मिलती जिसकी रॉयल्टी भी नहीं मिल पाती और करोड़ों की संख्या में अवैध रूप से ईट बनती है। जितना माल नहीं बनता उससे ज्यादा जगदलपुर जिले में शासकीय तथा अशासकीय कार्यों में खपत है। जिसमें छोटे-छोटे किसान आदिवासी ईट बनाने की नियम कानून की प्रक्रिया बहुत ही कठिन है। खनिज विभाग इनमें ध्यान नहीं देता है। जिला कलेक्टर महोदय से निवेदन है कि इस नियम कानून को सरलीकरण किया जाए जिसमें ग्रामीण लोगों को भरपूर मात्रा में रोजगार प्राप्त होगा। जिससे शासन को रॉयल्टी भी मिलेगी, पर ईटो पर कमीशन खोरी करने वाले अधिकारियों की चोरी की बंद होगी

खनिज विभाग इसमें आंख मूंद कर बैठा है। समस्याओं का कोई निराकरण नहीं करते हैं इसमें अवैध वसूली का खेला चल रहा है इसी तरह गिट्टी खदान वालों को समय में रॉयल्टी प्राप्त नहीं होती है


खनिज अधिकारी प्रकरण तो बनाते हैं जो उन्हें सुविधा शुल्क नहीं देता, लेकिन खनिज जिस वाहन में परिवहन किया जा रहा है। उसकी ठीक तरह से जांच नहीं किया करते, क्योंकि रेती, ईट, गिट्टी, अधिकतर हाईवा टिप्पर,ट्रैक्टरों, पिकअप ऑटो से ढोया जाता है। जगदलपुर में अधिकतर ट्रैक्टर कृषि परपस पर चल रही है। कमर्शियल ट्रैक्टर बहुत कम हीं देखने को मिलेंगे। क्योंकि कमर्शियल ट्रैक्टरों में क्वार्टरली ट्रैक्टर का 325 रुपए टैक्स ट्रॉली का 825 रुपए टैक्स भरना होता है। इसी को बचाने के लिए ट्रैक्टर मालिक कृषि परपस से वाहन को चला रहा है। जिससे सरकार का राजस्व का नुकसान हो रहा है आरटीओ फ्लाइंग अधिकारी निष्क्रिय हो चुके हैं। जब बड़ी दुर्घटना होती है तो सक्रिय हो जाते हैं।


जैसे जब कभी एक्सीडेंट होता है। तो जल्द ही वहां ब्रेकर बना दिया जाता है। उसी तरह सभी विभाग निष्क्रिय चल रहे हैं। इस कारण माल ढोने वाले माफिया के हौसले बुलंद हो रहे हैं


कलेक्टर महोदय प्राथमिक तौर से इन बातों को संज्ञान में लीजिए और कड़ी कार्यवाही करते हुए जांच करें।

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