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फीस के नाम परीक्षा से तो वंचित नहीं होंगे छात्र, बहुत आम नागरिको की शिकायत हो रही प्राप्त, जिला प्रशासन प्राइवेट स्कूलों मे करें हस्तकक्षेप, वैसे ही मेहगांई की मार झेल रही हैँ जनता- नरेन्द्र भवानी




 फीस के नाम परीक्षा से तो वंचित नहीं होंगे छात्र, बहुत आम नागरिको की शिकायत हो रही प्राप्त, जिला प्रशासन प्राइवेट स्कूलों मे करें हस्तकक्षेप, वैसे ही मेहगांई की मार झेल रही हैँ जनता- नरेन्द्र भवानी

फीस नहीं तो प्रवेश पत्र नहीं के फरमान पर प्रशासरन संज्ञान ले कि कोई छात्र परीक्षा से वंचित ना हो। - नरेन्द्र भवानी

मामले मे छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेन्द्र भवानी ने बयान जारी कर कहा हैँ की,प्रदेश में 10 वीं 12 वीं बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली है। बस्तर जिले में भी प्रशासन द्वारा उचित प्रबंध किये जा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा के संदर्भ जिले के कलेक्टर द्वारा 20 फरवरी से 18 मार्च के बीच होने वाली इस परीक्षा के लिए व्यापक दिशा निर्देश जारी किये गये हैं,जिसमें प्रमुख रूप से दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ कोलाहल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा-4 एवं धारा-6 के अंतर्गत तीव्र संगीत, हार्नटाइप, ध्वनि विस्तारक का उपयोग अनुज्ञा के बिना तत्काल प्रभाव से सम्पूर्ण कांकेर जिला में राजस्व सीमा के अंदर प्रतिषेध किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा अधिनियम की धारा-7 के अंतर्गत ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग की अनुमति प्रदान करने के लिए जिले के संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार (कार्यपालिक दण्डाधिकारी) को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है।

सभी प्राधिकृत अधिकारियों को परीक्षा के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्र चलाए जाने हेतु अनुमति के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों की पंजी रखेंगे और उसके प्रत्येक आवेदन पत्र की तिथि एवं समय का विवरण दर्ज किया जाएगा तथा परीक्षण पश्चात पृथक से अनुमति आदेश जारी किए जाएंगे। कलेक्टर ने सभी प्राधिकृत अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अनुमति की सूचना संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस एवं थाना प्रभारी को दी जाए साथ कलेक्टर कार्यालय को भी इसकी सूचना दी जाए।


इसके अतिरिक्त सामाजिक रूप से समाजसेवियों द्वारा कई जगह अपने अनुसार किसी भी छात्र का सहयोग के लिए मोटर वाहनों में छूट जैसी गतिविधियां देखने मिलती है।

 लेकिन जैसा कि जिले में निजी स्कूलों की मनमानी की खबर एवं शिकायत आ रही है। कुछ स्कूलों द्वारा पूरी फीस जमा करने के बाद ही प्रवेश पत्र देने की बाध्यता की जा रही है,जिसके चलते बच्चों के मन में परीक्षा के अतिरिक्त मानसिक दबाव बन गया है। अगर निजी स्कूल के इस फीस की बाध्यता की फरमान मान ली जाय तो कई आर्थिक रूप से कमजोर पालकों के बच्चे परीक्षा से वंचित हो सकते हैं,जिसका खामियाजा उन्हें जिंदगी भर भुगतना पडेगा।

बच्चों के भविष्य को देखते हित में होगा कि यदि किसी बोर्ड परीक्षा के बच्चों के परीक्षा प्रवेश पत्र फीस के चलते नहीं दिया जा रहा है तो इस पर भी तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। जो कि अनिवार्य शिक्षा कानून का खुला उल्लंघन है। कलेक्टर द्वारा जारी ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश तो हैं, पर नगरों,गावों में बदस्तुर जारी है।

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