प्रदेश में पुराने वाहनों की खरीदी एवं बिक्री पर लग रहा 1% टैक्स, हद तो यह है कि वाहन चाहे 10 से 15 साल पुराना हो उसे पर भी शोरूम कीमत के अनुसार टैक्स लिया जा रहा है। जबकि जब हम ऑनलाइन ट्रांसफर फीस पटाने जाते हैं। फीस लेता है टैक्स का ऑप्शन नहीं है। संबंधित बाबू के द्वारा कहा जाता है। हमारे द्वारा आईडी दी जा रही है उसमें आप 1% टैक्स जमा कर दीजिए, जमा करेंगे तभी काम होगा नहीं तो काम रुक जाएगा। ट्रांसफर की सरकारी फीस करीबन 22,00,से 2300 तक है पहुंच गई है अन्य खर्च मिलकर कभी ₹3000 खर्च होते हैं और उस पर 1% टैक्स वसूली होने पर 6000 से 10000 तक का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है। यहां तक की वाहन मालिक कि मृत्यु उपरांत, यदि पत्नी या बच्चे को अपनी चल संपत्ति पर नाम चढ़ाना है। तो भी टैक्स लिया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक राज्य में हर साल डेढ़ लाख पुराने वाहनों की बिक्री होती है, इसमें आधे से ज्यादा दो पहिया और 25 फीस दिखा रहे हैं बाकी माल वाहक व बड़े वाहन बिकते हैं।
केदार कश्यप परिवहन मंत्री का कहना, यह गलत फैसला वापस लेंगे पता नहीं कैसे टैक्स वसूलने पर निर्णय हो गया। ये पूरी तरह से गलत है। शोरूम कीमत वाला मापदंड किसी भी सूरत में उचित नहीं है इस फैसले को वापस लेंगे।

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