जगदलपुर :- मामला ऐसा रहा की ग्राम पंचायत नियानार जो तहसीलदार नानगुर मे आता है का धुरवापारा मे जिसका खसरा क्रमांक 759 है जो शासकीय भूमि है,पर गांव के ही कुछ लोग बड़ी चालाकी से पहले ही इस भूमि को शहर के किसी गुप्ता को मलबा खरीदी बिक्री कर सूत्रों के अनुसार लगभग 6 लाख मे बेच दिया गया 75 डिसमिल जमीन को और लगभग 6 साल बाद अब वही गांव के जमीन बिक्री का काम करने वाले अब इसी शासकीय भूमि को पुरे 15 लाख मे सौदा किया गया, सूत्रों की माने तो ख़रीदार गीदम नांका स्थित बिहार का निवासी है जो बस्तर जिला के जगदलपुर मे भी अपने जीवन यापन के लिए रहना होता है, जब इसी अवैध शासकीय भूमि की विक्रय की जानकारी मिली तो बकायदा नियानार के पटवारी को इसका शिकायत कराया गया फिर शासकीय भूमि मे जमीन लेवल व बाउंड्रीवॉल का कार्य किया जा रहा था जिसे पटवारी द्वारा तत्काल रोका गया कुछ हफ्तों के बाद वही जमीन बेचने वाले जबरन उस शासकीय भूमि मे फिर से अतिक्रमण करने के मकसद से इंटा और रेट का भंडार करने का प्रयास किये जिसे दुबारा पटवारी द्वारा रोका गया अंतः कल दिनांक 25 फ़रवरी को नानगुर तहसीलदार व नायाब तहसीलदार मौके पर उपस्थित हो कर आस पास के सब लोगो को बुलाकर नियमानुसार उस शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने पर रोक लगाते हुवे कहा गया की जबतक कोई उचित निर्णय ऊपर से ना हो जाए इस भूमि पर किसी भी प्रकार का कोई अतिक्रमण व निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा
यह भी माना जा रहा है की जिस स्पीड से इस नियानार गांव मे शासकीय भूमियो का बिक्री किया गया है कुछ लोगो के द्वारा की उन पर नियमानुसार कार्यवाही भी होना तय है क्युकी उन्ही लोगो द्वारा और भी बहुत से लोगो को छल पूर्वर्क बड़े बड़े रोड से लगे शासन की भूमि को लाखों रुपय के दर पर बेचा गया है, हमारे पास कुछ दस्तावेज भी उपलब्ध है जिससे साबित होता है की नियानार पंचायत के पूर्व सरपंच जिन्होंने बकायदा अपना सील साइन करके दिनांक 6/6/2013 मे एक जमीन का मलबा खरीदी बिक्री नामा बना शासकीय भूमि का विक्रय किया था जो गैर कानूनी कृत्य है, जल्द ही नानगुर तहसीलदार के सामने और कई सारे शासकीय भूमि का बिक्री किया गया कई भूमि पर घर निर्माण कर बस्ती बस गए पर कई भूमि आज भी खुले मे है किसी ने बाउंड्री बना रख रखा है तो कोई ख़रीदार उस शासकीय भूमि का उपयोग कर रहा है, जल्द ही ऐसे शासकीय भूमि का विक्रय करने वालों का नकाब उतारा जाएगा !

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Narendra Bhawani khud ek number ka Dalal Hai kalcha ek ekad sarkari jameen kabja karke Rakha Hai
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