रिपोर्टर - रजत डे - बस्तर जिला संवादाता
जगदलपुर। जगदलपुर शहर की सड़कों पर आज सुबह का एक दृश्य फिर से ट्रैफिक व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया। एक टैक्सी में क्षमता से कहीं अधिक लोग और सामान लादकर खुलेआम मुख्य सड़क पर फर्राटा भरते नजर आए। कुछ लोग ऑटो के पीछे लटकते हुए, तो कुछ ऊपर सामान के बीच अपनी जगह बनाए हुए दिखे—मानो यह कोई स्टंट शो हो, न कि रोजमर्रा की सवारी। सुबह की हल्की धुंध, व्यस्त सड़क और तेज रफ्तार के बीच इस तरह की ‘जुगाड़ यात्रा’ ने साफ कर दिया कि शहर में ट्रैफिक नियम सिर्फ किताबों और बोर्डों तक सीमित हैं।
हेलमेट और सीट बेल्ट की जांच तो अक्सर दिखाई देती है, लेकिन ओवरलोडिंग जैसे खुले उल्लंघन पर मानो अदृश्य चश्मा चढ़ा लिया गया हो। व्यंग्य यह है कि “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है” के नारों के बीच लोग अपनी जान को दांव पर लगाकर सफर करने को मजबूर हैं। सवाल यह भी है कि क्या यह मजबूरी है या लापरवाही? क्या पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन की कमी लोगों को ऐसे जोखिम उठाने पर मजबूर कर रही है, या फिर नियमों का पालन करवाने वाली व्यवस्था सुस्त हो चुकी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ओवरलोडिंग किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। एक हल्का ब्रेक, सड़क पर अचानक मोड़ या सामने से आती तेज गाड़ी—और नतीजा बेहद गंभीर हो सकता है। स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक विभाग से अपेक्षा है कि वे केवल चालान अभियान तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित निगरानी, जागरूकता अभियान और वैकल्पिक सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था पर भी ध्यान दें। क्योंकि सड़कें रोमांच के लिए नहीं, सुरक्षित सफर के लिए होती हैं।

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