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दंड माटी पूजा के साथ कुम्हड़ाकोट संगम में मनाया जाएगा जगतु महरा स्मृति दिवस - वृद्धाश्रम



बस्तर की धरती के माता पुजारी और दानवीर माने जाने वाले जगतू महरा के स्मृति दिवस के अवसर पर इस वर्ष भी 13 मार्च को कुम्हड़ाकोट नदी तट संगम स्थल पर श्रद्धा और आस्था के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर समाज के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दंड माटी की पूजा-संतुष्टि कर उन्हें भावपूर्ण पवित्रता देंगे।

कार्यक्रम को लेकर समाज के लोगों में उत्साह का प्रतीक देखा जा रहा है। संगम स्थल पर सुबह से ही समाज के बुजुर्ग, युवा और ग्रामीण समूह और पेड़ों की परंपरा के अनुसार पूजा-सचेत कर माटी के प्रति अपनी आस्था प्रकट होगी। यह संस्था नागालैंड के सांस्कृतिक वर्ष और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है, जिसमें हर बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर दानवीर जगतू महाराजा को नमन करते हैं।

कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए नेतृत्वकर्ता राष्ट्रपति ने बताया कि जगतू महरा की धरती और समाज के लिए योगदान अप्रसारिक है। हर साल उनके स्मृति दिवस पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में समाज को एकजुट करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उनके त्याग और स्मारकों से जुड़े बंधनों का भी माध्यम दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी बड़ी संख्या में समाज के लोग, स्मारक और युवा कार्यक्रम में दंड माटी की पूजा कर अभिषेक करेंगे।

उन्हीं समाज के सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में कुम्हड़ाकोट संगम स्थल पर इस कार्यक्रम में भाग लें और जंगल के माता पुजारी दानवीर जगतू महरा को अपनी शपथ दिलाएं। यह आयोजन न केवल स्मरण का अवसर है, बल्कि नटखट की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का भी प्रतीक है।

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